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साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। 

हम सभी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कई सालों के बाद आता है और चंद्र ग्रहण तथा सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है.

मन का तंत्र : मंत्र को सिद्ध करने के लिए पवित्रता और मंत्र के नियमों का पालन तो करना जरूरी ही है साध ही यह समझना भी जरूरी है कि मंत्र को सिद्ध करने का विज्ञान क्या है। मन को एक तंत्र में लाना ही मंत्र होता है।

साधना के समय जल का लोटा अपने पास रखें। 

तीर पतर लियो हाथ, चौसठ जोगनिया खेले पास।

मंत्र जप के दौरान अनुशासन:- मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखें। झूठ, क्रोध अथवा किसी भी चिंता से दूर रहें। साधना के दौरान धूम्रपान या अन्य नशा करना भी वर्जित है।

पतने get more info पानी करे। गुआ करे। याने करे। सुते करे।

साधना समय में असली धूप का हीं उपयोग करें। 

साधना आरम्भ से पूर्व मंत्र को कण्ठस्थ करके'जप करें। 

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साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन अवश्य करें।

साधना काल में धूम्रपान या कोई अन्य नशा आदि न करें। 

साधना काल में शुद्ध देशी घी का अखण्ड दीपक जलायें।

भोजन और आहार में संयम:- साधना के दौरान मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का त्याग करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।

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